Friday, March 14, 2008

कब थमेंगी जहरखुरानी की घटनाएं

रेल सुरक्षा तंत्र की तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेनों में जहरखुरानी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जहरखुरानी की बढ़ती घटनाओं से रेल यात्रियों में दहशत है। वहीं रेलवे की कार्य पद्धति पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं।गुरुवार को मुंबई से कमाकर घर लौट रहा यात्री जहरखुरानों के हत्थे चढ़ गया। आजमगढ़ जिले के जहानागंज निवासी राजेश कोल्हापुर में किसी कंपनी में काम करता है। राजेश कई महीने कमाने के बाद ट्रेन से अपने घर आ रहा था। वाराणसी में जहरखुरानी गिरोह की उस पर नजर पड़ गई। बकौल राजेश जहरखुरानों ने आत्मीयता जताते हुए अपने को उसी के गांव के आस पास का होना बताया। इसके बाद सभी ने चाय पी और भटनी की तरफ आने वाले 550 डाउन पैसेंजर ट्रेन में सवार हो गए। वाराणसी के एकाध स्टेशन आगे बढ़ने के बाद राजेश बेहोश हो गया। रात होने के चलते सहयात्रियों ने राजेश को निद्रामग्न होना जानकर ध्यान नहीं दिया। इस बीच जहरखुरानों ने राजेश की अटैची पर हाथ साफ कर दिया। राजेश के सोए रहने पर सहयात्रियों को शंका हुई। उन्हें माजरा समझते देर नहीं लगी और अचेतावस्था में स्थानीय रेलवे स्टेशन पर उतार दिया। जीआरपी की मदद से अद्धüमूछिüत राजेश को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद सीयर ले जाया गया। राजेश के पाकेट में मिली डायरी के आधार पर उसके परिजनों को फोन कर बुलाया गया। राजेश की अटैची में पांच हजार रुपये नकद, कपड़े व अन्य जरूरी सामान थे। कुछ ऐसी ही घटना करीब पखवारेभर पहले मनियर थाना क्षेत्र के पिलुई निवासी छोटे लाल कुर्मी के साथ हुई थी। बंबई से कमाकर आ रहे छोटेलाल को जहरखुरानों ने वाराणसी रेलवे स्टेशन परिसर में ही अपना शिकार बना लिया था। उसके पास से नकदी समेत सभी सामान ले लिया गया था। बड़ी मुश्किल से छोटेलाल चार दिन बाद अपने गांव पहुंचा था। ऐसी घटनाएं रोज घट रही हैं। इसके सबसे ज्यादा शिकार बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग हो रहे हैं। लेकिन बिहारी रेल मंत्री होने के बावजूद इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वैसे ही लालू यादव गपोड़शंखी हैं और उन्हें गपोड़ करने में ही मजा आता है। चूंकि इसका कोई राजनीतिक माइलेज उन्हें मिलता नजर नहीं आ रहा है - लिहाजा उनका ध्यान इस ओर नहीं है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ऐसा कब तक होता रहेगा- कब तक निरीह और गरीब बिहारी-पूरबिया इसका शिकार बनते रहेंगे।

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