Tuesday, February 3, 2009

तो पोर्न उद्योग को भी चाहिए राहत का पैकेज !

उमेश चतुर्वेदी
क्या आप उम्मीद कर सकते हैं कि किसी एशियाई मुल्क में पोर्न उद्योग को बचाने के लिए खुलेआम मांग उठे। आपको सुनने में ये हैरतनाक भले ही लग रहा हो – लेकिन अमेरिका में ऐसी मांग उठने लगी है। दरअसल एशियाई मुल्कों में सेक्स और इससे जुड़ा पोर्न उद्योग भले ही ढके-छुपे चलता हो, लेकिन यूरोपीय और अमेरिकी समाज के लिए सेक्स और नैतिकता कोई दबी-छुपी बात नहीं है-लिहाजा यहां पोर्न साहित्य और सेक्स से जुड़ी चीजों के व्यापार ने भी बाकायदा एक उद्योग की शक्ल अख्तियार कर ली है। यही वजह है कि अब इस उद्योग को बचाने के लिए अमेरिका में मांग भी उठने लगी है। इस साल के दूसरे हफ्ते में अमेरिका की मशहूर पोर्न मैगजीन हसलर के मालिक लैरी फ्लिंट और टीवी पर प्रसारित किए जाने वाले मशहूर पोर्न कार्यक्रम गर्ल्स गॉन वाइल्ड के प्रोड्यूसर जो फ्रांसिस एक साथ प्रेस के सम्मुख अवतरित हुए। उन्होंने अमेरिकी सरकार से मांग की कि अमेरिका के पोर्न उद्योग को मंदी से बचाने के लिए पांच अरब डॉलर की सहायता दी जानी चाहिए।
वैश्विक मंदी का सामना कर रहा अमेरिकी समाज इन दिनों तरह-तरह की चिंताओं से परेशान है। मंदी ने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अमेरिकी समाज के सामने ढेरों चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इनके बीच एक और परेशानी से अमेरिकी समाज दो-चार हो रहा है। जाहिर तौर पर ये चिंताएं बेहद निजी और पारिवारिक हैं। चूंकि अमेरिकी समाज बेहद खुला है, लिहाजा ये निजी चिंताएं भी इन दिनों मीडिया में चर्चा और बहस का विषय बनी हुई हैं। ऐसी ही चिंताओं में से एक है अमेरिकी लोगों की सेक्स लाइफ की समस्या। मंदी का अमेरिकी लोगों की सेक्स लाइफ पर क्या असर पड़ रहा है, इसे लेकर भी इन दिनों वहां अध्ययनों और निष्कर्षों की बाढ़ आई हुई है। अमेरिकी मीडिया इन दिनों ऐसे अध्ययन रिपोर्टों से भरा पड़ा है।
ऐसा नहीं कि सबको यही चिंता सता रही है कि मंदी के चलते अमेरिकी लोगों की सेक्स लाइफ कम हो रही है या होगी। अभी हाल ही में एक अध्ययन रिपोर्ट अमेरिकी अखबारों में छपी। जिसे भारत के भी कुछ बड़े अखबारों ने प्रकाशित किया। अमेरिका के कुछ जाने-माने नृतत्वशास्त्रियों ने साल दो हजार नौ को सेक्स वर्ष घोषित किया है। उनका मानना है कि मंदी के चलते जीवन में आई नीरसता से बचने के लिए अमेरिकी लोग इस साल अपने बेडरूम का सहारा लेंगे। अगर ऐसा ही रहता तो अमेरिकी लोगों को कम से कम अपने इस बेहद निजी मसले पर चिंतित होने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए थी। सरकार को भी परेशान होने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए थी। लैरी फ्लिंट और जो फ्रांसिस की मांग के बाद अमेरिकी सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि इस मांग से सरकार परेशान जरूर है।
अमेरिका में यूं तो मंदी की छाया पिछले साल जुलाई में ही दिखने लगी थी। लेकिन सितंबर में जब लीमैन ब्रदर्स ने खुद को दिवालिया घोषित किया तो मंदी की ये मार सतह पर आ गई। इसके साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था के डांवाडोल होने की खबरें तेज हो गईं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तर्ज पर विकसित हो रही दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं भी इस मंदी की मार से बच नहीं सकीं। भारत के शेयर बाजार, प्रॉपर्टी और ऑटोमोबाइल उद्योग की भी हालत छुपी नहीं है। इस पर काफी-कुछ लिखा और पढ़ा जा रहा है। चुनावी साल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राष्ट्रपति जार्ज बुश ने अक्टूबर में 700 अरब डॉलर के पैकेज का ऐलान किया। जिसे तीन अक्टूबर को सीनेट की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी तक पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है। वैसे अमेरिका में मंदी का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, बीमा और ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ा है और 700 अरब डॉलर का ये पैकेज भी इन्हीं उद्योगों के लिए घोषित किया गया है। इसके बावजूद ऑटोमोबाइल उद्योग खुद के लिए अलग से 25 अरब डॉलर के पैकेज की मांग भी कर रहा है। जिसके लिए पिछले साल सीनेट की समिति के सामने ऑटोमोबाइल उद्योग के प्रतिनिधियों ने अपना मांग पत्र पेश भी किया। जॉर्ज बुश जाते-जाते अलग से 350 अरब डॉलर का पैकेज देना चाहते थे। हालांकि सीनेट ने इसे मंजूर नहीं किया और जॉर्ज बुश का ये सपना अधूरा ही रह गया।
बहरहाल पोर्न उद्योग का तर्क है कि जब इतना भारी-भरकम पैकेज बैंकिंग, बीमा और ऑटोमोबाइल उद्योग को देने के लिए मंजूर किया जा सकता है तो उसे बचाने के लिए पैकेज क्यों नहीं दिया जा सकता है। वैसे भी अमेरिका में पोर्न उद्योग कोई छोटा-मोटा उद्योग नहीं है। इसका सालाना टर्न ओवर करीब 13 अरब डॉलर है। इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। भारतीय उपमहाद्वीप और अरब देशों में भले ही ये तर्क अटपटा लगे। लेकिन अमेरिकी पोर्न उद्योग का कहना है कि वहां के मानसिक स्वास्थ्य को बचाए रखने के लिए इस उद्योग को भी बचाया जाना जरूरी है। अपनी प्रेस कांफ्रेंस में लैरी फ्लिन्ट ने जो तर्क दिया, वह भी गजब का है। उन्होंने कहा कि मंदी के दौर में जिस तरह ऑटोमोबाइल की खरीद-बिक्री कम हो गई है, कुछ वैसे ही आम अमेरिकियों की यौनेच्छा कम हो गई है। फ्लिन्ट का कहना है कि भले ही मोटर गाड़ियां न खरीदी जायं, लेकिन इस बीमारी को व्यापक नहीं होने दिया जा सकता।
जिस तरह नए आर्थिक मॉडल ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को जमीन देखने के लिए मजबूर किया है – कुछ वैसी ही हालत वहां के पोर्न उद्योग के लिए भी है। खबरें तो ऐसी भी आ रही हैं कि आम अमेरिकी इसे लेकर नाक-भौं सिकोड़ रहा है। दरअसल नए आर्थिक और सामाजिक मॉडल में अमेरिकी ने नई व्यवस्था गढ़ी है, उसी के कुचक्र में वह फंसता नजर आ रहा है। पोर्न उद्योग की मांग और उसका खुलकर ऐसा तर्क देना भी इसी का प्रतीक है।
जार्ज बुश तो इस उद्योग को बचाने का कोई उपाय तो नहीं कर गए, लेकिन अब पोर्न उद्योग की निगाहें नए राष्ट्रपति बराक ओबामा पर टिक गई हैं। उसे उम्मीद है कि ओबाम उसकी मांग का जरूर खयाल रखेंगे। हालांकि कुछ – कुछ परंपरावादी मान्यताओं के पक्षधर रहे ओबामा के लिए इस मांग पर खुल कर विचार करना ही आसान नहीं होगा, मांग पूरा करना तो अलग की बात है।