Saturday, November 12, 2011

मनियर की टिकुली की खोने लगी चमक

बिरहा गायक बालेसर का एक गीत है नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के...लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि बलिया का मनियर कस्बा भी टिकुली यानी बिंदी उद्योग में जाना-माना नाम था। लेकिन यूपी सरकार की उपेक्षा और आधुनिकता के दबाव में यह उद्योग अपनी चमक खो रहा है। इस पर अमर उजाला ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसी रिपोर्ट का संपादित अंश यहां पेश किया जा रहा है।
सुहागिनों के माथे की बिंदी कभी देश के विभिन्न महानगरों में अपनी चमक से बलिया जिले का नाम रोशन करती थी लेकिन अब यह चमक धुंधली पड़ती जा रही है। मनियर नगर पंचायत में तैयार की गई बिंदी-टिकुली यूपी, बिहार ही नहीं विभिन्न प्रांतों के साथ महानगरों तक भेजी जाती थी। लेकिन यह कारोबार इन दिनों अपनी पहचान खोता जा रहा है। अब इस के अस्तित्व को बचाने के लिए किसी रहनुमा की दरकार है।

Friday, November 11, 2011

कब लगेगी ऐसे हादसों पर रोक

उमेश चतुर्वेदी
उलटबांसियों में जीने की आदत जितनी भारतीय समाज को है...उतनी दुनिया के शायद ही किसी समाज में होगी..यूरोप और अमेरिका में भयानक मंदी के दौर में भी भारतीय अर्थव्यस्था ना सिर्फ बची हुई है...बल्कि आगे बढ़ रही है। दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर चल रहे भारत में आज भी एक वर्ग ऐसा है, जिसे अंधविश्वास के हद तक धार्मिक कर्मकांड आकर्षित करते हैं। इसके लिए उन्हें जान भी चुकानी पड़े तो वह कीमत छोटी होती है। उदारीकरण के दौर में आज की शिक्षा और मौजूदा अर्थव्यवस्था आधुनिकता का नया पैमाना माने जा रहे हैं। लेकिन इसी दौर में ऐसे भी लोग रहते हैं, जिन्हें अपनी जान कौड़ियों के मोल किसी धार्मिक कर्मकांड में गंवानी पड़ती है। हरिद्वार के गायत्री परिवार का दावा नए युग निर्माण और नई समाज व्यवस्था बनाने का है।