Thursday, August 30, 2012

मोदी का गुणगान ना होने के मायने


यह लेख अमर उजाला कॉपैक्ट में प्रकाशित हो चुका है।  

उमेश चतुर्वेदी
गुजरात में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच दिल्ली में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन हो और उसमें मोदी का नाम आदर्श और मानदंड के तौर पर पार्टी आलाकमान पेश ना करे तो हैरत होनी ही चाहिए। क्योंकि अब तक ऐसे सम्मेलनों में उन्हें ऐसा ही अटेंशन मिलता रहा है। लेकिन इस बार ना तो बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने गुजरात को मॉडल राज्य और वहां के शासन से सीखने की दूसरे मुख्यमंत्रियों को नसीहत दी और ना ही दूसरे नेताओं ने। आडवाणी तो वैसे भी पहले से ही मोदी से नाराज बताए जा रहे हैं।

Monday, August 27, 2012

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 मोर्चा संभालें महिलाएं
उमेश चतुर्वेदी
जिंदगी के तमाम मोर्चों पर बदलते पैमानों के बावजूद अब भी महिलाओं को लेकर भारतीय समाज पारंपरिक ढंग से ही सोचता रहा है। उसकी नजर में महिलाएं सुंदरता और कोमलता का ही प्रतीक हैं। हालांकि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों में तैनात महिलाएं अपने जज्बे और बहादुरी के साथ ही कर्त्तव्यपरायणता की सफल परीक्षा देती रही हैं। इस वजह से महिलाओं की सेना में तैनाती तो की जाने लगी, लेकिन शायद पारंपरिक आग्रहों का ही असर रहा है कि दुश्मन के खिलाफ मोर्चे पर तैनाती को लेकर भारतीय सेना अब तक तैयार नहीं हो पाई है।
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मतभेदों की भेंट ना चढ़ें लक्ष्य
उमेश चतुर्वेदी
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के घेराव के मसले पर टीम अन्ना में मतभेद कोई पहली खबर नहीं है। इसके पहले भी कई मसलों पर टीम के बीच मतभेद रहे हैं। दरअसल टीम अन्ना उस तरह के वैचारिक निष्ठा के तौर पर बनी या विकसित नहीं हुई है, जैसे कोई राजनीतिक या सामाजिक संगठन खड़ा होता है। जिसे टीम अन्ना आजकल कहा जा रहा है, दरअसल वह ऐसे लोगों का समूह है, जो देश से भ्रष्टाचार का समूल नाश चाहते हैं। इसमें शामिल प्रमुख लोगों की अपनी अलग-अलग पृष्ठभूमि और सामाजिक-राजनीतिक विचारधाराएं हैं। कोई अतिवामपंथी पृष्ठभूमि का है तो किसी का वैचारिक विकास राष्ट्रवाद के तहत हुआ है।

Monday, August 20, 2012


मोदी का गुणगान ना होने के मायने
उमेश चतुर्वेदी
यह अकारण नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में इस बार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वैसी तरजीह नहीं मिली, जैसी मिलती रही है। अपनी नाराजगी से पहले तक ऐसे सम्मेलनों में मोदी से सीख लेने की सलाह लालकृष्ण आडवाणी देते रहते थे। बाद के दौर में पार्टी आलाकमान गुजरात के शासन मॉडल को अपनाने की सलाह अपने दूसरे मुख्यमंत्रियों को देता रहा। इससे रमण सिंह और शिवराज सिंह चौहान जैसे मुख्यमंत्रियों की निराशा की खबरें सामने आती रही थीं। पार्टी में भावी अगुआई को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हरी झंडी के बावजूद नरेंद्र मोदी को अब तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन स्वीकार करता नजर आ रहा है। बीजेपी में भी उनकी अगुआई को लेकर अंदरूनी गुटबाजी बढ़ी ही है।