Saturday, November 3, 2012

सोशल मीडिया की लत



उमेश चतुर्वेदी
सूचना तकनीक के मौजूदा हथियारों मसलन मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इंटरनेट और सोशल मीडिया के आने के पहले तक चौराहे और चौपाल पर सुबह-शाम लगने वाली गप्प गोष्ठियां रोजाना घरेलू कलह की वजह बनती रही हैं। लेकिन बतरस की लत ही ऐसी थी कि बड़े-बड़े सूरमा तक इसमें डूबने में ही आनंद पाते रहे हैं। कुछ ऐसी ही हालत बदले दौर में बतरस का अड्डा बने सोशल मीडिया का भी है। अब लोग इसमें इतना डूब जाते हैं कि उन्हें दुनिया-जहान की परवाह ही नहीं रहती। इसमें सबसे ज्यादा बाजी मार ली है फेसबुक ने।
जर्मनी में हुए एक शोध के बाद तो शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि फेसबुक की लत तो सेक्स की चाहत पर भी भारी पड़ जाती है। जवान लोगों पर लगातार एक हफ्ते तक चले शोध में पाया गया कि वैसे तो इन लोगों को सेक्स की तेज चाहत तो होती थी, लेकिन वे उन पर काबू पाकर ईमेल, या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने को तवज्जो देना पसंद करते थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि फेसबुक, ट्विटर या ई मेल आदि को इस्तेमाल करने की चाहत को रोक पाना ज्यादा कठिन होता है क्योंकि ये चीज़ें ज्यादा आसानी से उपलब्ध होती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ईमेल चेक करना या फेसबुक पर अपडेट करना सेक्स करने से ज्यादा आसान और सहज होता है इसलिए भी उनकी चाहत ज्यादा प्रबल होती है। इस शोध में शामिल दक्षिणी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के कैरेन नौर्थ का कहना है कि भले ही सेक्स की चाह ज्यादा प्रबल हो,  लेकिन उसके लिए माहौल की भी जरूरत होती है। लेकिन एसएमएस या ईमेल चेक करने के लिए माहौल की जरूरत नहीं होती। शायद यही वजह है कि लोगों की सोशल मीडिया को लेकर लत बढ़ रही है। हालांकि शोध में मनौवैज्ञानिक इससे होने वाले नुकसान को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं, लेकिन यह तय है कि यह लत हमारे सामाजिक व्यवहार और जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़े बिना नहीं रहना है। भारतीय युवाओं  पर तो इसका मनोवैज्ञानिक असर नजर आने लगा है। सड़कों पर बढ़ी दुर्घटनाओं के लिए सोशल मीडिया और मोबाइल फोन को जिम्मेदार ठहराया ही जा रहा है। चूंकि भारत में मोबाइल उपभोक्ता दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा हैं, लिहाजा वक्त आ गया है कि इस लत को मर्यादित करने की दिशा में सोचा जाय।

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