Tuesday, June 4, 2013

एनएसी से अरूणा रॉय के निकलने के निहितार्थ

उमेश चतुर्वेदी
यूपीए एक की जिन योजनाओं की कामयाबी ने यूपीए दो की राह बनाई थी, उनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा खासी महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। इस योजना के तहत पूरे देश में न्यूनतम मजदूरी देने की अनुशंसा जिस दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खारिज कर दी थी, तकरीबन उसी दिन से माना जाने लगा था कि मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और इस योजना की सबसे बड़ी पैरोकार अरूणा रॉय सोनिया गांधी की अगुआई वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से अलग हो सकती हैं। वैसे तो उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है। लेकिन कार्यकाल बढ़ता, इसके पहले ही उन्होंने खुद सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाए जाने की मांग कर दी थी। अरूणा रॉय का राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से जाना जितनी बड़ी खबर है, उससे कहीं ज्यादा बड़ी खबर मनरेगा में जारी भ्रष्टाचार और उस पर तकरीबन पूरे उत्तर भारतीय राज्यों में उठते सवाल भी हैं।